कभी नेपाल में बकरियां चराते थे जीतू राय, अब भारत के लिए जीता गोल्ड मेडल

jeetu rai
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नई दिल्ली. निशानेबाज जीत राय ने ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में नए गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया है। उन्होंने 235.1 अंक पाए हैं और इस स्पर्धा में पहला स्थान भी। भारत को स्वर्ण पदक दिलाते ही जीतू को पूरे देश से बधाइयां मिल रही हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, आज देश को स्वर्ण दिलाने वाले जीतू कुछ साल पहले तक नेपाल में बकरियां चराया करते थे! जानिए निशानेबाज जीतू की प्रेरक कहानी।

1. जीतू राय पिस्टल किंग के नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने निशानेबाज़ी में कई मेडल जीते हैं। बचपन में वे नेपाल के गांव में खेती में सहयोग किया करते थे। उस समय कोई अंदाज नहीं लगा सकता था कि एक दिन जीतू अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज ​बनेंगे। वे बकरियां चराया करते थे। इसके अलावा भैंसों के तबेले की सफाई भी करते थे।

2. जीतू का जन्म नेपाल के संखुवासभा गांव में हुआ था। उनके पिता भारतीय फ़ौज में सेवा दे चुके हैं। उन्होंने चीन और पाकिस्तान के खिलाफ युद्धों में अदम्य साहस का परिचय दिया था। पिता से प्रेरणा लेकर जीतू सेना में भर्ती हो गए। उस समय उनकी उम्र 20 साल थी। दरअसल पहले उनकी मंशा ब्रिटिश फौज में भर्ती होने की थी। एक संधि के तहत नेपाल के नागरिक ब्रिटिश फौज में भर्ती हो सकते हैं। भारत के साथ भी नेपाल की संधि है, इसके अंतर्गत हजारों नेपाली भारतीय सेना में भर्ती होकर देशसेवा कर रहे हैं।

3. जब वे 2006 में ब्रिटिश फौज में भर्ती होने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने पहुंचे तो वहां भारतीय सेना में रजिस्ट्रेशन हो रहे थे। ब्रिटिश फौज के लिए रजिस्ट्रेशन का समय बाद में था। जीतू ने भारतीय सेना में भर्ती होना पसंद किया और उनका चयन हो गया। इसके बाद उन्होंने काफी समय लखनऊ में बिताया।

4. भारतीय सेना में भर्ती होने के बाद जीतू की निशानेबाजी में और निखार आया। आज उसी की बदौलत उन्होंने देश का नाम रोशन किया है। अगर आपको भी जीतू की यह कहानी पसंद आई तो इसे दूसरों तक पहुंचाएं। साथ ही भारतीय सेना के नाम एक सैल्यूट जिसने जीतू जैसा हीरा देश को दिया।