भारत में नहीं हैं ये हिन्दू मंदिर, इनकी कहानियां कर देंगी दंग

हिन्दू धर्म कितना पुराना है इसका ठीक-ठीक हिसाब कहीं पता नहीं चलता। हालांकि ये साफ है कि एक वक्त हिन्दू धर्म भारत से बाहर भी फैला था और वहां बने मंदिर इस बात की गवाही देते हैं। चलिए आपको ऐसे ही कुछ मंदिरों के बारे में बताते हैं।

पुरा बेसकिह मंदिर, बाली

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बाली में बना ये मंदिर काफी पुराना है। माना जाता है कि बेसकिह शब्द संस्कृत के वासुकि शब्द से आया है, वासुकि नाग का वर्णन कई ग्रंथों और पुराणों में पाया जाता हैं। वासुकि शब्द को बाद में जावा भाषा में बदल कर बेसकिह कर दिया गया। जावा भाषा में बेसकिह का अर्थ होता है- बधाई।

पुरा तमन सरस्वती मंदिर, बाली

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देवी सरस्वती को समर्पित यह मंदिर बाली के उबुद में है। देवी सरस्वती को हिन्दू धर्म में विद्या, ज्ञान और संगीत की देवी माना जाता हैं, इसलिए यहां पर भी देवी सरस्वती की पूजा ज्ञान और विद्या की देवी के रूप में ही की जाती है। यहां पर एक सुन्दर कुंड भी बना है, जो इस मंदिर का मुख्य आकर्षण है। यहां हर रोज संगीत के कार्यक्रम होते हैं।

सिंघोसरी शिव मंदिर, जावा

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13वी शताब्दी में बना सिंघसरी मंदिर पूर्वी जावा के सिंगोसरी में बना हुआ है। यह विशाल मंदिर अपनी भव्यता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यह मंदिर भगवान् शिव को समर्पित है। मंदिर में भगवान् शिव की एक विशाल प्रतिमा स्थापित है।

तानह लोट मंदिर, बाली

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ये प्रसिद्ध मंदिर इंडोनेशिया के बाली में एक विशाल समुद्री चट्टान पर बना है। यह मंदिर 16वीं सदी में निर्मित बताया जाता है। यह मंदिर बाली द्वीप के हिन्दुओं की आस्था का बड़ा केंद्र हैं। यह मंदिर सागर तट पर बने उन सात मंदिरों में से एक है जिन्हें एक श्रृंखला के रूप में बनाया गया है। हर मंदिर से अगला मंदिर दिखता है। माना जाता है कि बुरी आत्माओं और घुसपैठियों से इस मंदिर की सुरक्षा इसकी शिला के नीचे रहने वाले विषैले सर्प करते हैं।

प्रम्बानन मंदिर, जावा

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10वीं शताब्दी में बना शिव का यह बेहद प्रसिद्ध है। कहते हैं कि जावा के प्रबु बका नामक दैत्य राजा की एक बहुत ही सुंदर रोरो जोंग्गरंग नामक बेटी थी। बांडुंग बोन्दोवोसो नाम का एक व्यक्ति राजा की बेटी से शादी करना चाहता था। बोन्दोवोसो के शादी के प्रस्ताव को मना करने के लिए रोरो ने उसके आगे एक ही रात में एक हजार मूर्तियां बनाने की शर्त रखी।

शर्त पूरा करने के लिए बोन्दोवोसो ने एक ही रात में 999 मूर्तियां बना दी और वह आखिरी मूर्ति बनाने जा ही रहा था, तभी रोरो ने पूरे शहर के चावल के खेतों में आग लगवा कर दिन के समान उजाला कर दिया। धोखा खा कर बोन्दोवोसो आखिरी मूर्ति नहीं बना पाया और शर्त हार गया। बाद में जब बोन्दोवोसो को सच्चाई का पता चला, वह बहुत गुस्सा हो गया और उसने रोरो को आखिरी मूर्ति बन जाने का श्राप दे दिया। प्रम्बानन मंदिर में रोरो की उसी मूर्ति को देवी दुर्गा मान कर पूजा जाता है। इस मंदिर की कथा रोरो जोंग्गरंग से जुड़ी होने की वजह से यहां के स्थानीय लोग इस मंदिर को रोरो जोंग्गरंग मंदिर के नाम से भी जानते हैं।