खजुराहो के मंदिरों का क्या है राज़? आखिर क्यों हुआ था इनका निर्माण?

Khajuraho India

भारत में बहुत से मंदिरों की स्थापना प्राचीन काल में हुई है जिनमें आज भी प्राचीन समय की सभ्यता तथा संस्कृति नजर आती है। लेकिन इनके निर्माण के पीछे कई रोचक बातें निकल कर सामने आती हैं कि आखिर इस तरीके से ही क्यों हुआ इसका निर्माण ? आखिर क्या ख़ास वजह थी ? आज हम बात कर रहे हैं अपनी तरह के इकलौते मंदिर माने जाने वाले खजुराहो के मंदिर की जो संसार में अपना एक अलग ही महत्व रखते हैं। दरअसल खजुराहो के मंदिर अपनी कामुक और निर्वस्त्र मूर्तियों के कारण दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। हर साल लाखों देशी-विदेशी पर्यटक इन्हें देखने पहुंचते हैं। आपको बता दें खजुराहो के मंदिरों का निर्माण 950 ई.से 1050 ई. के बीच हुआ है।

मंदिर की स्थापना

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प्रारंभ में खजुराहो में 85 मंदिर थे, लेकिन अब 22 ही बचे हैं। लेकिन बची हुई ये मूर्तियां प्राचीन सभ्यता की विशेषता बताने के लिए काफी हैं। कई बार मन में यह प्रश्न उठता है कि आखिर मंदिर के बाहर इस तरह की मूर्तियां बनाने के पीछे राज क्या हो सकता है। वैसे देखा जाए तो इस बारे में एक राय नहीं मिलती। अलग-अलग विश्लेषकों ने अलग-अलग राय दी हैं, लेकिन जो मुख्य रूप से चार मान्यताएं हैं आज हम उनके बारे में बात करेंगे।

पहली मान्यता के अनुसार

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इन कामुक मुर्तियों के बारे में कुछ विश्लेषकों का यह मानना है कि प्राचीन काल में राजा-महाराजा भोग-विलासिता में अधिक लिप्त रहते थे। सेक्स को लेकर वे काफी उत्तेजित रहते थे। अत: उनकी कामुक उत्तेजना को दर्शाने हेतु इसी खजुराहो मंदिर के बाहर नग्न एवं संभोग की मुद्रा में विभिन्न मूर्तियां बनाई गई हैं।

क्या कहती है दूसरी मान्यता

अन्य विश्लेषकों की बात करे तो उनका यह मानना है कि इसे प्राचीन काल में सेक्स की शिक्षा की दृष्टि से बनाया गया है।  ऐसा माना जाता है कि उन अद्भूत आकृतियों को देखने के बाद लोगों को संभोग की सही शिक्षा मिलेगी। प्राचीन काल में मंदिर ही एक ऐसा स्थान था, जहां लगभग सभी लोग जाते थे। इसीलिए संभोग की सही शिक्षा देने के लिए मंदिरों को चुना गया। तो कहा जा सकता है कि इन मुर्तियों का उद्देश्य सेक्स संभोग शिक्षा देने से है।

तीसरी मान्यता की मानें तो

कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि मोक्ष के लिए हर इंसान को चार रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ,ऐसा माना जाता है कि इसी दृष्टि से मंदिर के बाहर नग्न मूर्तियां लगाई गई हैं। क्योंकि यही काम है और इसके बाद सिर्फ़ और सिर्फ़ भगवान की शरण ही मिलती है। इसी कारण इसे देखने के बाद भगवान के शरण में जाने की कल्पना की गई। पुराणों के अनुसार इन मान्यताओं को भी नकारा नहीं जा सकता।

चौथी मान्यता

इन विश्लेषको की मान्यता सबसे भिन्न है। दरअसल इन लोगों का इन सबके अलावा इसके पीछे हिंदू धर्म की रक्षा की बात बताई गई है। इन लोगों के अनुसार जब खजुराहो के मंदिरों का निर्माण हुआ, तब बौद्ध धर्म का प्रसार काफी तेजी के साथ हो रहा था। कहा जाता है कि चंदेल शासकों ने हिंदू धर्म के अस्तित्व को बचाने का प्रयास किया और इसके लिए उन्होंने इसी मार्ग का सहारा लिया। उनके अनुसार प्राचीन समय में ऐसा माना जाता था कि सेक्स की तरफ हर कोई खिंचा चला आता है। इसीलिए यदि मंदिर के बाहर नग्न एवं संभोग की मुद्रा में मूर्तियां लगाई जाएंगी, तो लोग इसे देखने मंदिर आएंगे। फिर अंदर भगवान का दर्शन करने जाएंगे।  इससे हिंदू धर्म को बढ़ावा मिलेगा। इन मूर्तियों के पीछे धर्म के होने की बात कही गई है।