5 अफसर जिन्होंने अपनी जान दे दी लेकिन फर्ज से मुंह नहीं मोड़ा

आईएएस डीके रवि

आईएएस डीके रवि बेहद ईमानदार थे। 16 मार्च 2015 को रवि की संदिग्ध मृत्यु हो गई। रवि लोगों की परेशानियां सुनते थे और उस पर कार्रवाई भी करते थे। वे इतने सरल और सहज थे कि जमीन पर लोगों के साथ ही बैठ जाते थे। बैंगलौर स्थित उनके आवास से उनका शव मिला था। सरकार का कहना था कि उन्होंने आत्महत्या की है। उनकी मौत के बाद जनता सड़कों पर उतर आई और सीबीआई जांच की मांग करने लगी।

आईपीएस नरेंद्र कुमार

2012 में मध्य प्रदेश के मुरैना में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने गए आईपीएस नरेंद्र कुमार को ट्रैक्टर से कुचल कर मार डाला गया। 2009 बैच के आईपीएस नरेंद्र की ईमानदारी के बारे में पूरा इलाका जानता था। बलुआ पत्थर के अवैध खनन को रोकना नरेंद्र के लिए जानलेवा साबित हो गया। नरेंद्र ने परिवार ने आरोप लगाया कि खनन माफिया ने उसकी हत्या कराई है लेकिन आरोपी ने कोर्ट में कहा कि यह सिर्फ एक हादसा था। आईपीएस नरेंद्र की पत्नी आईएएस हैं, जिस वक्त यह घटना हुई वह गर्भवती थीं।

डीएसपी जिया उल हक

यूपी के प्रतापगढ़ के कुंडा में थी जिया उल हक की तैनाती। 10 मार्च 2012 के रोज वह एक दोहरे हत्याकांड की जांच के लिए मौके पर गए थे लेकिन बेकाबू भीड़ ने उनकी जान ले ली। जिया की पत्नी परवीन और बाकी लोगों ने आरोप लगाया कि इस हत्याकांड के पीछे इलाके के बाहुबली राजनेता राजा भैया का हाथ है। इस आरोप के बाद राजा भैया ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और अखिलेश यादव ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी। जिया की मौत के बाद गुस्साई भीड़ ने काफी तोड़फोड़ भी की थी। जिया के परिवार को कभी यकीन नहीं हुआ कि वह भीड़ का शिकार बन गए।

मंजूनाथ

आईओसी यानि के इंडियन ऑयल कार्पोरेशन के अधिकारी थे मंजूनाथ जिन्होंने आईआईएम लखनऊ से पढ़ाई की थी। 2005 में गोली मार कर उनकी हत्या कर दी गई थी। यूपी के लखीमपुर खीरी में एक पेट्रोल पंप पर वे तेल का नमूना लेने गए थे जहां उनको गोली मार दी गई। माना जाता है कि पेट्रोल में मिलावट रोकने की ‘सजा’ उनको मिली। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने मिलावट रोकने की कोशिश की, पहले उन्हें माफिया द्वारा लालच दिया गया लेकिन उनके कदम नहीं डगमगाए, इसके बाद माफिया ने उनकी जान ले ली। हाल ही में मंजूनाथ की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा छह लोगों को उम्रकैद की सजा दी गई।

सत्येंद्र दुबे

बिहार के सीवान जिले में पैदा हुए सत्येंद्र दुबे NHAI में इंजीनियर थे। 27 नवंबर 2003 के रोज बिहार के गया में उनको सर्किट हाउस में गोली मार दी गई थी। उन्होंने एनएचएआई में हो रहे भ्रष्टाचार का खुलासा करते हुए प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई को चिट्ठी लिखी थी और साथ में अपना बायोडाटा (सीवी) भी भेजा था। सीबीआई ने इस मामले की जांच की और एक कुएं से दुबे का सामान बरामद कर लिया, साथ ही तीन लोगों को भी गिरफ्तार किया।