बैंक जिसने छापे थे, 5 और 10 हज़ार के नोट

1 अप्रैल 1935 में भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना की गई थी। शुरुआत में आरबीआई निजी बैंक था, लेकिन 1949 में भारत सरकार ने इसे अपना उपक्रम बना दिया। रिजर्व बैंक को आज भारत का केन्द्रीय बैंक माना जाता है और भारत में मौजूद अन्य बैंकों का संचालन किया जाता है। चलिए जानते हैं आरबीआई ये जु़ड़े कुछ रोचक तथ्य।

1. आरबीआई का लोगो मोहर से प्रेरित-रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का लोगो पहले वह ईस्‍ट इंडिया कंपनी की डबल मोहर से प्रेरित था, बाद में इस लोगो में  बदलाव किया गया।

2. निजी से सरकारी बनी आरबीआई-रिजर्व बैंक का गठन एक निजी संस्‍था के रूप में 1 अप्रैल, 1935 को किया गया था, लेकिन  1949 में  भारत सरकार ने इसे अपना उपक्रम बना दिया और यह सरकारी संस्था बन गई।

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3. फाइनेंशियल ईयर 1 जुलाई से 30 जून-भारत में फाइनेंशियल ईयर 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है, जबकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का फाइनेंशियल ईयर 1 जुलाई से शुरू होकर 30 जून को समाप्‍त होता है।

4. सिर्फ करंसी नोट-आरबीआई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सिर्फ करंसी नोटों की छपाई करता है। जबकि, सिक्‍कों को बनाने का काम भारत सरकार के द्वारा किया जाता है।

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5. उडेशी बनी पहली महिला डिप्‍टी गवर्नर-केजे उडेशी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की पहली महिला डिप्‍टी गवर्नर बनीं थी। उन्‍हें साल 2003 में इस पद पर नियुक्‍त किया गया।

6. 5 और 10 हजार के नोट भी छापे-रिजर्व बैंक ने 5,000 और 10,000 रुपए के नोटों की छपाई साल 1938 में की थी। इसके बाद 1954 और 1978 में भी इन नोटों की छपाई की गई थी।

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7. पाकिस्‍तान और म्‍यांमार का भी था सेंट्रल बैंक-भारत के अलावा रिजर्व बैंक दो अन्‍य देशों पाकिस्‍तान और म्‍यांमार के सेंट्रल बैंक के रूप में अपनी भूमिका निभा चुका है। आरबीआई ने जुलाई 1948 तक पाकिस्‍तान और अप्रैल 1947 तक म्‍यांमार (वर्मा) के सेंट्रल बैंक के रूप में काम किया।

8. देशभर में आरबीआई के हैं 29 ऑफिस-रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के देशभर में 29 ऑफिस हैं। इसमें से अधिकांश ऑफिस राज्‍यों की राजधानी में है।

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9. पूर्व पीएम मनमोहन सिंह रह चुके हैं गवर्नर-मनमोहन सिंह अकेले ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं, जो कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर के पद पर कार्य कर चुके हैं।

10. देशमुख आरबीआई के पहले भारतीय गवर्नर-सीडी देशमुख पहले ऐसे भारतीय थे, जिन्‍होंने आरबीआई के गवर्नर का पदभार संभाला था और वे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के तीसरे गवर्नर बने। इसके अलावा वह वर्ष 1951-52 में अं‍तरिम बजट के समय भारत के वित्‍त मंत्री भी रह चुके हैं। देशमुख बैंकों के राष्‍ट्रीयकरण करने के खिलाफ थे।