हंसते-हंसते देश के लिए फांसी के फंदे पर झूल गए थे सुखदेव

24 साल की उम्र में ही देश के लिए कुर्बान सुखदेव हुए थापर को आज भी उनके साहस और बलिदान के लिए याद किया जाता है। भगत सिंह और राजगुरू के साथ लाहौर षड़यंत्र मामले में फांसी पर लटकने वाले सुखदेव का जन्म 15 मई 1907 को पंजाब के लुधियाना शहर में हुआ था। जानिए बचपन से क्रांतिकारी रहे सुखदेव के जीवन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें।


कॉलेज में हुई भगत सिंह से मुलाकात
कॉलेज के दौरान सुखदेव लाहौर के नेशनल कॉलेज में युवाओं में देशभक्ति की भावना भरते के साथ ही स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़ने के लिए प्रेरित युवाओं को प्रेरित करते थे। इसी दौरान उनकी मुलाक़ात भगत सिंह से हुई। इन दोनों के इतिहास के अध्यापक ‘जयचंद्र विद्यालंकार’ थे, जिन्होंने इनके अंदर व्यवस्थित क्रांति का बीज डाला।

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लाला लाजपत राय की मौत का बदला
1926 में सुखदेव ने अन्य क्रांतिकारी साथियों के साथ मिलकर लाहौर में नौजवान भारत सभा शुरू की। इस टीम मे भगत सिंह, यशपाल, भगवती चरण औक जयचंद्र विद्यालंकार जैसे क्रांतिकारी भी शामिल थे। ये एक ऐसा संगठन था जो युवकों को स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित करता था। वह खुद भी क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया करते थे। उनका नाम 1928 की उस घटना के लिए प्रमुखता से जाना जाता है जब क्रांतिकारियों ने लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए गोरी हुकूमत के कारिन्दे पुलिस उपाधीक्षक जेपी सांडर्स को मौत के घाट उतार दिया था।

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गांधी जी की नीति पर नहीं था भरोसा
सुखदेव को गांधी जी की अहिंसक नीति पर जरा भी भरोसा नहीं था। उन्होंने महात्मा गांधी को जेल से एक पत्र लिखा जो आज भी एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। सुखदेव ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए लिखा था “मात्र भावुकता के आधार पर की गई अपीलों का क्रांतिकारी संघर्षों में कोई अधिक महत्व नहीं होता और न ही हो सकता है।”

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हंसते-हंसते चढ़े फांसी के फंदे पर
इस घटना ने ब्रिटिश साम्राज्य को हिलाकर रख दिया था और पूरे देश में क्रांतिकारियों की जय-जय कार हुई थी। सांडर्स की हत्या के मामले को ‘लाहौर षड्यंत्र’ के रूप में जाना गया। इस मामले में राजगुरु, सुखदेव और भगत सिंह को मौत की सजा सुनाई गई। 23 मार्च 1931 को तीनों क्रांतिकारी हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए और देश के युवाओं के मन में आजादी पाने की नई ललक पैदा कर गए। शहादत के समय सुखदेव की उम्र मात्र 24 साल थी।