भानगढ़ से जुड़ी इन सच्चाईयों को जान कर तो आप भी चौंक जाएंगे

भानगढ़ के बारे में कभी सुना है आपने? भानगढ़ राजस्थान के अलवर जिले में है और माना जाता है कि यहां भूतों का बसेरा है। लोग कहते हैं कि इस किले में रात को आने वाला वापस नहीं जा पाता। हालांकि बड़ी तादाद में लोग यहां घूमने के लिए आते हैं लेकिन रात होने से पहले ही वापस चले जाते हैं।

आस पास के लोग कहते हैं कि रात के वक्त यहां पर पायल की आवाजें सुनाई देती हैं और घुंघरुओं की गूंज भी। विकीपीडिया के मुताबिक इस किले का निर्माण 1573 में हुआ।

ये किला भूतिया कैसे बना इस बारे में कई कहानियां सुनाई जाती हैं। इंटरनेट पर मौजूद जानकारी से ये तो साफ है कि किला बहुत मजबूत है। अब सवाल ये है कि आखिर से किला इस हालत में कैसे पहुंचा?

किले की कहानी

ASI (जयपुर सर्किल) के मुताबिक इस किले का निर्माण आमेर के राजा भगवानदास ने 16वीं शताब्दी के अन्त में कराया था। भानगढ़ राजा मानसिंह के भाई माधोसिंह की राजधानी रहा।

मानसिंह को अकबर का बहुत करीबी माना जाता है। भानगढ़ में किला है, बाजार हैं, हवेली हैं, मंदिर हैं और राजभवन भी हैं। गोपीनाथ मंदिर, सोमेश्वर मंदिर, केशवराय मंदिर और मंगला देवी मंदिर यहां के महत्वपूर्ण मंदिर हैं।

राजभवन को सतमहला कहा जाता है क्यों यह सात महलों से मिलकर बना था हालांकि इनमें से अब 4 ही बाकी बचे हैं। भानगढ़ से पांच किलोमीटर दूर है सोमसागर तालाब, जिसके किनारे से एक पत्थर मिला था। इस पत्थर से पता चला कि माधो सिंह अकबर के दरबार में दीवान थे।

राजस्थान टूरिज़्म की वेबसाइट के मुताबिक भानगढ़ का निर्माण 17वीं शताब्दी में हुआ था। सोमेश्वर मंदिर और गोपीनाथ मंदिर की कुछ नक्काशियां अच्छी हैं। मान्यताओं के अनुसार एक दुष्ट जादूगर ने श्राप दिया था जिसके कारण यहां सब खत्म हो गया।

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श्राप की कहानी

ऐसा कहा जाता है कि भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती बहुत सुंदर थी और इसी सुंदरता पर एक ऐसा शख्स भी फिदा था जो काले जादू का महारथी था। जिस दूकान से राजकुमारी के लिए इत्र जाता था, वह उस दूकान में गया और उस बोतल पर जादू कर दिया जो राजकुमारी के लिए भेजी जाने वाली थी।

राजकुमारी को बोतल मिली तो सही लेकिन एक पत्थर पर गिरकर टूट गई। जादूगर ने ऐसा जादू किया था कि इत्र लगाने वाला उसे (जादूगर को) प्यार करने लगे। अब इत्र पत्थर को लगा था तो पत्थर ही जादूगर से प्यार में उसकी ओर चल पड़ा।

पत्थर ने जादूगर को कुचल दिया लेकिन मरने से पहले उसने भानगढ़ की बर्बादी का श्राप दे दिया। कुछ वक्त के बाद एक युद्ध हुआ जिसमें भानगढ़ तबाह हो गया और यहां रहने वाले सभी लोग मारे गए।

एक और कहानी भी है प्रचलन में

एक और कहानी के मुताबिक यहां एक साधु रहते थे और महल के निर्माण के वक्त उन्होंने चेतावनी दी थी कि महल की ऊंचाई कम रखी जाए ताकि परछाई उनके पास तक ना आए। लेकिन बनाने वाले ने इस बात का ध्यान नहीं रखा और अपनी मर्जी से महल को बनाया। साधु ने गुस्से में श्राप दिया जिससे भानगढ़ तबाह हो गया।

तीसरी कहानी

इस तीसरी कहानी के मुताबिक 1720 में भानगढ़ इसलिए उजड़ने लगा था क्योंकि यहां पानी की कमी थी। 1783 में एक अकाल पड़ा जिसने यहां रिहाइश को खत्म कर दिया और भानगढ़ पूरी तरह से उजड़ गया।

सूरज ढलने के बाद नो एंट्री

सूरज ढ़लने के बाद किसी को इस किले में जाने की इजाजत नहीं है। यह चेतावनी एएसआई ने जारी की है। बोर्ड पर साफ साफ लिखा है कि सूर्यास्त से पहले और सूर्यास्त के बाद किसी को भीतर जाने की अनुमति नहीं है। हालांकि ऐसा इसलिए भी है कि अंदर मौदूद केवड़े के पेड़ों को नुकसान ना पहुंचे।

स्पेशल फेक्ट्स

  1. एएसआई, राजस्थान टूरिज़्म और विकीपीडिया पर भानगढ़ के निर्माण की तारीखें अलग अलग दी हुई हैं।
  2. हर न्यूज़ चैनल इस पर स्टोरी कर चुका है और तमाम अखबारों में भी भानगढ़ की कहानी छप चुकी है।
  3. भानगढ़ पर कई डॉक्युमेंट्री बन चुकी हैं और एक बॉलीवुड फिल्म भी।
  4. यहां स्थित भवनों में छत नहीं है सिवाय एक हनुमान मंदिर के।
  5. कहते हैं कि यहां अगर कोई छत बनवाए तो वह रात में टूट जाती है।
  6. स्थानीय लोग दावा करते हैं कि यहां राजकुमारी की आत्मा रहती है।
  7. दूर-दूर से तांत्रिक भी यहां साधना करने के लिए आते हैं।
  8. माना जाता है कि लोग खजाने के लालच में यहां आए और यहां की यह हालत कर दी।
  9. मंदिर इसलिए सुरक्षित हैं क्योंकि उनको बर्बाद करने की किसी ने हिम्मत नहीं की।
  10. कुछ मंदिरों से मूर्तियां भी गायब हैं, और माना जाता है कि ये चोरों का काम है।