मुगलों के राज में जब शिवजी बन गए ख़ुदा, आज भी होती है इसी नाम से पूजा

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यूं तो भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों की पूजा होती है, लेकिन उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में शिवजी के उस स्वरूप को पूजा जाता है जिसके बारे में शायद ही आप जानते हों। यहां शिवजी ख़ुदा के रूप में पूजे जाते हैं। इस पूजन पद्धति का नाम ख़ुदा पूजा है। काफी संख्या में लोग इस पूजा में भाग लेते हैं। यह इलाका चीन सीमा के नजदीक है।

शिवजी कैसे बने ख़ुदा?
इस पूजा को देखकर प्राय: लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि यहां शिवजी ख़ुदा कैसे बन गए। इसका इतिहास मुगल काल से जुड़ा हुआ है। जब भारत में मुगलिया सल्तनत थी तो इस इलाके में उसके कुछ सिपाही आए। चूंकि यहां शिवजी के अलखनाथ स्वरूप की पूजा हो रही थी। इसलिए जब सिपाहियों ने श्रद्धालुओं से इस संबंध में पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि ख़ुदा की पूजा हो रही है।

संभवत: इसके पीछे उन्हें आसान शब्दों में समझाने की मंशा रही होगी। कुछ श्रद्धालु यह भी मानते हैं कि ख़ुदा की पूजा बताने के कारण उन्हें पूजन की अनुमति मिल गई। उसके बाद भगवान शिव ख़ुदा के नाम से पूजे जाने लगे और आज तक यह सिलसिला जारी है।

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रोचक रिवाज
इस पूजा के आयोजन को लेकर कई रिवाज प्रचलित हैं। कहीं यह 12 वर्षों में एक बार होती है तो कहीं विषम वर्षों में होती है। इसकी एक परंपरा बहुत रोचक है। यह पूजा रात के अंधेरे में ही पूर्ण होती है। जिस भवन में पूजा का आयोजन होता है, उसकी छत का एक भाग खुला छोड़ा जाता है। मान्यता है कि इसी मार्ग से भगवान पूजा स्थल पर उपस्थित होते हैं।

पूजा में स्थानीय परंपराओं का विशेष पालन किया जाता है। इसके लिए श्रद्धालुओं को पवित्र सरोवर में स्नान करना होता है। विधिपूर्वक शुद्ध होने के बाद वे देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की स्थापना करते हैं। फिर पूजन आदि करने के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद दिया जाता है। ख़ुदा पूजा अपनी परंपरा, प्राचीन के साथ ही खास नाम की वजह से भी प्रसिद्ध है।