जापान में सदियों से हो रही है मां सरस्वती के इस रूप की पूजा, कीजिए दर्शन

saraswati in japan
saraswati in japan

टोक्यो. हिंदू धर्म के देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां विभिन्न देशों में मिलती रही हैं। इसके अलावा दुनिया की महान संस्कृतियों का संबंध हिंदू धर्म व भारतीय संस्कृति से किसी न किसी रूप में रहा है। जापान की एक प्राचीन देवी के चित्र को देखकर यह अवधारणा और मजबूत होती है, क्योंकि इसे देखकर आप सहज ही अनुमान लगा सकते हैं कि यह ज्ञान की देवी सरस्वती का दूसरा रूप है।

1. यूं तो जापान में हिंदू धर्म से मिलते-जुलते काफी देवताओं की पूजा होती है। यहां बेंजैतेन नामक एक देवी का खासतौर पर पूजन किया जाता है। इसका स्वरूप हूबहू सरस्वती जैसा है। लोग इसे सरस्वती का जापानी स्वरूप भी कहते हैं। इस देवी का ओसाका में ढाई सौ फीट ऊंचा मंदिर विराजमान है।

2. बेंजैतेन देवी हा​थ में वाद्य यंत्र लिए हुए है जो वीणा के समान है। इसे जापानी में बिवाह कहा जाता है। जिस प्रकार भारत में सरस्वती नदी थी। उसी प्रकार जापान में एक बड़ी झील का नाम बिवाह है। बेंजैतेन देवी भी ज्ञान, कला, विवेक, सुंदरता और सद्बुद्धि की देवी मानी जाती हैं। जापानी लोग इनका पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

3. बेंजैतेन देवी का संबंध कुदरत से भी है। इसलिए देवी के मंदिरों के आसपास काफी पौधे होते हैं। जापानी लोगों का मानना है कि स्वस्थ तन और मन के लिए बेंजैतेन की पूजा के साथ प्रकृति का सान्निध्य आवश्यक है। वहीं संगीत के विद्यार्थी बेंजैतेन को प्रणाम करने के बाद ही वाद्ययंत्रों को छूते हैं। माना जाता है कि इससे उन्हें संगीत में ​शीघ्र सिद्धि प्राप्त होती है।

4. इतिहास और धर्म के विभिन्न विद्वान इस संबंध में शोध कर रहे हैं। उन्होंने शोध किया कि जापान में गणेश, विष्णु और नंदी की प्राचीन प्रतिमाएं हैं। इसके अलावा वहां के प्राचीन धार्मिक ग्रंथ संस्कृ​त में हैं। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि भले ही भौगोलिक रूप से भारत और जापान बहुत दूर हैं परंतु संस्कृति की डोर ने उन्हें सदियों से बांधे रखा है।

अगर आपको हमारी ख़बरें पसंद आईं तो हमें इस पेटीएम नंबर पर कुछ योगदान करें – 9695059039