कन्या की कुंडली में हो ऐसा अशुभ योग तो कम उम्र में हो सकती है पति की मृत्यु

bride and astrology
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ज्योतिष शास्त्र की मान्यता है कि व्यक्ति के जीवन में सुख और दुख कुंडली में स्थित उसके ग्रहों के कारण आते हैं। कुंडली का प्रत्येक भाव व्यक्ति के जीवन में बीते तथा आने वाले क्षणों की ओर इशारा करता है। विवाह से पूर्व किसी जातक की कुंडली का मिलान इसीलिए किया जाता है ताकि गुणों का मिलान किया जा सके। विशेष रूप से कन्या की कुंडली का अध्ययन बहुत आवश्यक है।

कन्या की कुंडली में ग्रहों की स्थिति यह स्पष्ट संकेत देती है कि उसका वैवाहिक जीवन कैसा होगा। कई बार जया भाव में अशुभ योगों का निर्माण हो जाता है। ऐसी स्थिति दुखद फल देती है। अक्सर देखा जाता है कि अशुभ योगों के निर्माण से पति या पत्नी में से किसी एक के जीवन को संकटों का सामना करना पड़ता है।

दुखदायक योग
ज्योतिष में विषकन्या नामक अशुभ योग का जिक्र आता है। विद्वानों के अनुसार, यह योग दुखद होता है। जिस कन्या की कुंडली में विषकन्या योग का निर्माण हो जाता है, उसे विवाह सुख बहुत कम मिलता है। इस योग का दुष्प्रभाव उसे पति या संतान सुख से वंचित कर देता है। देखा जाता है कि ऐसी स्थिति में उसके पति की मृत्यु तक हो जाती है।

यह योग खास स्थिति से ही निर्मित होता है। यदि अश्लेषा और शतभिषा नक्षत्र हो। रविवार को द्वितीया तिथि आ जाए। इसी प्रकार यदि कृतिका, विशाखा या शतभिषा में से कोई एक नक्षत्र रविवार, द्वादशी को उपस्थित हो। एक और स्थिति के अनुसार, यदि अश्लेषा या विशाखा या शतभिषा नक्षत्र हो .. उस रोज मंगलवार एवं सप्तमी तिथि उपस्थित हो। यह योग अशुभ होता है।

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ऐसे भी बनता है
​ज्योतिष के विद्वानों के अनुसार, श्लेषा नक्षत्र, दिन शनिवार एवं तिथि द्वितीया हो अथवा शतभिषा नक्षत्र, दिन मंगलवार एवं द्वादशी तिथि हो तो यह शुभ नहीं होती। शनिवार को कृतिका नक्षत्र, तिथि सप्तमी या द्वादशी उपस्थित हो तो अशुभ फल देती है। कुंडली का सप्तम भाव क्रूर ग्रहों से युक्त हो या सप्तम भाव पर क्रूर ग्रहों की दृष्टि पड़ती हो तो यह स्थिति कन्या के लिए दुखकारक होती है। उस विवाह के बाद पति की ओर से अथवा ससुराल पक्ष की ओर से विभिन्न कष्टों का सामना करना पड़ता है।

क्या है समाधान
अगर किसी कन्या की कुंडली में ऐसा योग बने तो उसे निराश होने की आवश्यकता नहीं है। इसके दुष्प्रभाव का निवारण सिर्फ भगवान शिव ही कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में कन्या को शिवजी का पूजन करना चाहिए। शिव की पूजा और सोमवार का व्रत उसके जीवन में सुख के क्षण लेकर आ सकता है।