5 हजार वर्षों से लगातार जल रही है इस श्मशान घाट की आग, बुझी तो होगी प्रलय!

kashi shamshan
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भगवान शिव की नगरी काशी को मोक्ष नगरी भी कहा जाता है। यहां भगवान विश्वनाथ का अत्यंत प्राचीन मंदिर है। चूंकि शिवजी से सृष्टि और संहार दोनों का संबंध है। काशी में एक श्मशान घाट ऐसा भी है जिसकी आग कई वर्षों से जल रही है। जी हां, हजारों वर्षों से यहां चिताएं लगातार जलती जा रही हैं। एक दिन भी ऐसा नहीं गुजरा जब यहां कोई चिता न जली हो।

इस जगह का नाम है मणिकर्णिका घाट है। इसके संबंध में कई प्राचीन कथाएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि जिस देह का यहां दाह संस्कार होता है, भगवान शिव उसकी आत्मा को मुक्ति प्रदान करते हैं। वह हमेशा के लिए पुनर्जन्म के बंधन से मुक्त हो जाता है।

यह घाट गंगा नदी के किनारे है। यहां हर रोज चिताएं जलती हैं। यहां के बारे में प्रचलित कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में इस स्थान पर मां पार्वती का कर्णफूल जलकुंड में गिर गया था। देवी के उस कर्णफूल की वजह से इस स्थान का महत्व और पवित्रता में वृद्धि हो गई।

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अत: यह मणिकर्णिका के नाम से मशहूर हो गया। तब से यहां चिताओं के दाह संस्कार का सिलसिला जारी है। स्थानीय लोग कहते हैं कि उन्होंने और उनके पूर्वजों ने ऐसा एक भी दिन नहीं देखा जब यहां कोई चिता न जली हो। इसकी अग्नि को वरदान प्राप्त है कि सृष्टि के आखिर तक जलती रहेगी।

इन्हीं विशेषताओं के कारण इस जगह का नाम महाश्मशान हो गया है। जो वृद्ध लोग मृत्यु के समीप होते हैं, उनकी इच्छा होती है कि वे इसी घाट पर मुक्ति प्राप्त करें। प्राचीन कथाओं के अनुसार, यहां मृतक के कान में शिवजी मुक्ति का मंत्र फूंकते हैं। उसके दाह संस्कार के बाद जो भस्म बनती है, वे उससे अपना शृंगार करते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह जगह शिवजी को बहुत प्रिय है। कम से कम पांच हजार वर्षों से यहां लगातार दाह संस्कार होते आ रहे हैं। जिस दिन इस घाट की अग्नि बुझ जाएगी, उसी दिन प्रलय आ जाएगी।