इस मंदिर में देवी प्याले से पीती है मदिरा, एक बूंद भी नहीं र​हती बाकी

bhuwal mata
bhuwal mata

मां दुर्गा के ऐसे कई मंदिर हैं जहां की रस्में और इतिहास बहुत अनूठे हैं। राजस्थान में दुर्गा का एक मंदिर ऐसा भी है जिसके बारे में कहा जाता है कि माता मदिरा का भोग स्वीकार करती है। यह मंदिर बहुत चमत्कारी माना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर में मां दुर्गा मदिरा के ढाई प्यालों का भोग लेती है। यह भवाल माता का मंदिर है जो राजस्थान के नागौर जिले की रियां तहसील में स्थित है। यहां लोग माता को भुवाल माता या भंवाल माता के नाम से भी जानते हैं।

मंदिर में देवी की दो प्रतिमाएं विराजमान हैं। एक देवी काली हैं और दूसरी देवी ब्रह्माणी हैं। ये दोनों प्रतिमाएं जमीन से निकली थीं। इन दोनों को ही अलग प्रकार का भोग चढ़ाया जाता है। ब्रह्माणी माता मिठाई का भोग लेती हैं और काली माता मदिरा का। इस मंदिर में हर साल हजारों लोग दर्शन के लिए आते हैं। कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति यहां सच्चे हृदय से मन्नत मांगता है, वह चमत्कारी ढंग से अवश्य पूर्ण होती है।

मन्नत मांगने के बाद जब वह पूरी होती है तो भक्त दो प्रकार का भोग लेकर आता है। एक मिठाई और दूसरा मदिरा। मिठाई तो ब्रह्माणी देवी को चढ़ा देते हैं। मदिरा काली माता को चढ़ाई जाती है। इसके लिए भक्त द्वारा लाई गई मदिरा पुजारी को दी जाती है। पुजारी चांदी के प्याले में मदिरा भरकर देवी के होठों से लगाता है। उस दौरान कोई भी देवी के मुख की ओर नहीं देखता।

bhuwal mata
bhuwal mata

माता प्रसन्न होकर यह भोग ग्रहण करती है। वे तुरंत मदिरा स्वीकार कर लेती हैं और प्याला खाली हो जाता है। थोड़ी देर बाद पुजारी प्याला उलट देता है। उस समय तक प्याले में एक बूंद मदिरा भी नहीं होती। देवी पूरा प्रसाद ग्रहण कर लेती है। इस मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है।

कहते हैं कि प्राचीन काल में यह स्थान पूरी तरह वीरान था। वि.सं. 1050 में यहां डाकुओं का दल छुपा हुआ था जो राजा की सेना से घिर गया था। उस समय डाकुओं ने माता से प्रार्थना की कि वे भविष्य में डकैती का काम छोड़ देंगे। वे उनके प्राण बचाएं। आश्चर्यजनक रूप से वे बच गए। तब उन्होंने जमीन से निकली देवी की प्रतिमा को प्रसाद चढ़ाना चाहा। उस वक्त उनके पास थोड़ी-सी मदिरा थी। उन्होंने देवी को यही चढ़ाया और देवी ने स्वीकार कर लिया। उस दिन से ही देवी को यह भोग चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई और अब तक जारी है।