मुंबईः ब्लू व्हेल से बचने के लिए स्कूलों में लगाए गए नेट

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कातिल और जानलेवा ब्लू व्हेल से बचाने के लिए कई स्कूल ब्लू व्हेल प्रूफ तैयार कर रहे हैं। अपने वाटर प्रूफ, साउंड प्रूफ और बुलेट प्रूफ का नाम सुना होगा, लेकिन अब पढ़िए कैसे ब्लू व्हेल प्रूफ बच्चों की जान बताएगा। मुंबई के स्कूल में हर मंजिल पर नेट लगाया गया है ।

ब्लू व्हेल के खतरे और उसके टास्क को पूरा करने के चक्कर में बच्चे को उठाए जाने वाले खौफनाक कदम से सबक लेते हुए स्कूल प्रशासन ने ये व्यवस्था की है अब अगर कोई बच्चा ब्लू व्हेल का टास्क पूरा करने के लिए स्कूल की बिल्डिंग से छलांग भी लगाता है, तो वो इस नेट में आकर फंस जाएगा।

90 सीसीटीवी कैमरे से बच्चों की हर हरकत पर नजर

ना सिर्फ स्कूल में नेट लगाए गये हैं बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल में करीब 90 सीसीटीवी लगाए गये हैं। इन कैमरों का आउटपुर स्कूल परिसर में लगाया गया है। यानी मुंबई के इस स्कूल ने ब्लू व्हेल के खतरे से निपटने की तैयारी कर ली है। लेकिन सवाल है कि आखिर बच्चे ब्लू व्हेल के जाल में कैसे फंस जाते हैं। ना सिर्फ प्राइवेट स्कूल, कई सरकारी स्कूल भी बच्चों को ब्लू व्हेल गेम के जानलेवा कहर से बचाने में जुटे हुए हैं।

बच्चों को बचाने के लिए स्कूल में लगा नेट:

ब्लू व्हेल को खतरे को देखते हुए मुरादाबाद के सरकारी स्कूल को अलर्ट किया गया है, स्कूल के प्रिंसिपल और टीचर प्रेयर के दौरान ही बच्चों के हाथ में कट के निशान चेक कर रहे हैं। बच्चों को ब्लू व्हेल गेम से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। बच्चों को ब्लू व्हेल के खौफनाक कहर से बचाने के लिए स्कूल में स्मार्ट फोन के लाने पर पाबंदी लगाई गई है।

‘रक्षक’ बचाएगा ब्लू व्हेल से बच्चों की जान:

ब्लू व्हेल का खतरा जितना बड़ा है उससे निपटने की चुनौती भी इतनी ही बड़ी है। जरूरत है अभिभावकों को अपने बच्चों पर नजर रखने की जरूरत है वो अपने बच्चों ज्यादा वक्त के लिए अकेला ना छोड़ें।