यहां गोली से ज्यादा है बर्फ का खतरा, 3 महीने तक नहीं नहा सकते हमारे फौजी

Siachen
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भारतीय सेना के वीर जवान सरहद पर दुश्मन से तो मुकाबला करते ही हैं। उन्हें उस जगह के मौसम से भी मुकाबला करना होता है। हमारी सेनाओं ने तपते रेगिस्तान से लेकर शरीर को जमा देने वाली बर्फ तक में तिरंगा फहराया है। सियाचिन ऐसी ही जगह है जहां भारत माता के ये सपूत अपनी जान की परवाह न करते हुए माइनस तापमान में भी बंदूक उठाए सरहद की रखवाली करते रहते हैं।

सियाचिन दुनिया का सबसे ऊंचा रणक्षेत्र है। इस जगह का मौसम बहुत ज्यादा प्रतिकूल है। इसे बर्फीला रेगिस्तान कहा जाता है जहां कुछ भी नहीं उगता। एक रिपोर्ट के अनुसार 1984 से अब तक 869 से ज्यादा सैनिक यहां जान कुर्बान कर चुके हैं। यहां गोली से ज्यादा बर्फ का खतरा रहता है।

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मौसम लेता है इम्तिहान
यहां हमारी सेना की करीब 150 पोस्ट हैं। इनमें 10 हजार जवान तैनात रहते हैं। अकेले सियाचिन की हिफाजत के लिए भारत को हर साल 1,500 करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च करने होते हैं। यहां दिन का तापमान माइनस 40 डिग्री और रात का तापमान माइनस 70 डिग्री तक चला जाता है। ऐसे मुश्किल हालात में हमारे सैनिक यहां लगातार गश्त करते रहते हैं।

गर्मी हो या सर्दी, हम तरोताजा होने के लिए रोज नहाते हैं, लेकिन सियाचिन में ऐसा करना खतरे से खाली नहीं है। यहां तैनात जवान तीन महीने तक नहा नहीं सकता। यही नहीं, वह दाढ़ी नहीं बना सकता। हर रोज अपनी चौकी से बर्फ हटानी होती है। अगर एक दिन भी बर्फ न हटाई तो नीचे दबने का खतरा बना रहता है।

बीमारियों का खतरा बरकरार
यहां पीने के लिए ताजा पानी उपलब्ध नहीं रहता। बल्कि बर्फ को गर्म कर उसमें एक खास किस्म का रसायन डालकर पीने योग्य बनाना होता है। यदि शरीर को पर्याप्त पानी न मिले तो कई बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। कड़ी सर्दी में फेफड़े, हृदय, आंख, हड्डी और त्वचा संबंधी रोग हो सकते हैं।

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वहीं उस ओर पाकिस्तान के सैनिक भी तैनात रहते हैं, इसलिए गोलीबारी की स्थिति में जवाबी हमले के लिए तैयार रहना होता है। पाकिस्तान इस इलाके पर बुरी निगाह रखता है, लेकिन जब तक हमारी सेना के जवान इस जगह तैनात हैं, सियाचिन और पूरा हिंदुस्तान महफूज है।