इस गांव की धरती पैदा करती है फौजी, भारत के लिए शहीद हो चुके 17 जांबाज

Indian Army
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राजस्थान का शेखावाटी क्षेत्र सेना और शहादतों के लिए जाना जाता है। यहां के सीकर, ​चूरू और झुंझुनूं जिले में ऐसे हजारों परिवार हैं जिनका कम से कम कोई एक सदस्य भारत की रक्षा के लिए सरहद पर तैनात हुआ है या युद्ध में दुश्मन से मुकाबला किया है। ऐसा ही एक गांव है धनूरी।

यह गांव झुंझुनूं जिले में स्थित है। धनूरी गांव की मिट्टी में देशप्रेम की भावना प्रबल है। यह एक मुस्लिम बहुल गांव है जो सेना, देशप्रेम और बलिदान के लिए जाना जाता है। यहां ऐसे कई परिवार हैं जिनके सपूत भारत के लिए शहीद हो चुके हैं।

करीब एक हजार घरों वाला यह गांव 550 से ज्यादा सपूत सरहद पर भेज चुका है। इसे फौजियों वाला गांव भी कहा जाता है। यहां पूर्व सैनिकों की संख्या करीब 300 है। वहीं 250 से ज्यादा लोग सेना में सेवा दे रहे हैं। धनूरी के बेटों ने जंगे मैदान में दुश्मन को करारा जवाब दिया है।

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यहां की स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का सपना होता है कि वे अपने पूर्वजों की परंपरा का सम्मान करते हुए सेना में जाएं और देश के सम्मान के लिए जान की बाजी लगा दें। धनूरी के लिए गर्व का विषय है कि यहां के 17 सैनिक हमारे देश के लिए शहीद हो चुके हैं। उनकी गाथाएं यहां के घरों में सुनाई जाती हैं।

इस गांव के कई परिवारों की पांचवी पीढ़ी भी सेना में है। इस तरह धनूरी देश की हिफाजत करने वाले सपूत पैदा करता है। इन्होंने सीमा की सुरक्षा से लेकर युद्धों और खतरनाक अभियानों में भाग लिया है। आतंकवादियों के नापाक इरादों को नेस्तनाबूद करने में धनूरी के सपूत हमेशा आगे रहे हैं। प्रथम विश्वयुद्ध से लेकर कारगिल और सैन्य अभियानों में शरीक हुए दिलेरों को पैदा करने वाली धनूरी की धरा पर हम सबको गर्व है।