मार्शल अर्जन सिंह ने एक घंटे के अंदर ही पाक के कैंपों को किया था ध्वस्त

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भारतीय वायुसेना के सबसे जांबाज सिपाही जिसने 1965 में एक घंटे के अंदर ही पाकिस्तान के कैंपों को ध्वस्त कर दिया। भारतीय एयरफोर्स के इतिहास में पहले प्रमुख जिन्होंने पहली बार देश के किसी युद्ध में एयरफोर्स का नेतृत्व किया। जो अपने बेजोड़ नेतृत्व के लिए भारतीय वायुसेना में एक मिसाल था। भारतीय वायुसेना के इस सितारे को पूरा देश नमन कर रहा है।

1950 में अर्जन सिंह ने भारतीय वायुसेना के ऑपरेशनल ग्रुप की कमान संभाली। अगस्त 1964 में अर्जन सिंह को भारतीय वायुसेना का प्रमुख बनाया गया। वे देश के तीसरे एयरचीफ थे। महज 45 साल की उम्र में ही अर्जन सिंह ने वायुसेना प्रमुख की कमान संभाली थी।

1970 में अर्जन सिंह 50 साल की उम्र में एयरफोर्स से रिटायर हुए। वायुसेना से रिटायर होने के बाद उन्हें 1971 में स्विट्जरलैंड में भारत का राजदूत बनाया गया। फिर 1974 में उन्हें केन्या के उच्चायुक्त की जिम्मेदारी दी गई। अर्जन सिंह वेटिकन सिटी में भी भारत के राजदूत रहे।

भारत लौटने के बाद उन्हें दिल्ली का उप राज्यपाल बनाया गया। 2002 में अर्जन सिंह वायुसेना के ऐसे पहले अधिकारी बने..जिन्हें फाइव स्टार रैंक दिया गया। उन्हें सम्मान देने के लिए पश्चिम बंगाल के पानागढ़ एयरफोर्स बेस का नाम अर्जन सिंह के नाम पर रखा गया है। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अर्जन सिंह की अगुवाई में वायुसेना ने पाकिस्तान को धूल चटा दी थी।

1 सितंबर 1965 को पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के छम्ब पर अचानक हमला बोल दिया था। तब पाकिस्तानी सेना यहां से अखनूर की तरफ बढ़ने लगी। पाक आर्मी को वहां की एयरफोर्स तब कवर दे रही थी। पाकिस्तानी लड़ाकू जहाजों के हमले से कश्मीर दहल उठा था।

जब हमले तेज हुए तो 3 सितंबर को एयर मार्शल अर्जन सिंह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से हवाई हमले की इजाजत मांगी। लाल बहादुर शास्त्री ने बिना देर किए बिना एयरफोर्स को ईंट का जवाब पत्थर से देने का आदेश दिया। उसी दिन शाम को 22 लड़ाकू जहाजों ने पाक फौज पर ताबड़तोड़ हमले की शुरूआत कर दी।

एक तरफ पाकिस्तान के अत्याधुनिक एफ-86 फाइटर जेट्स थे, जो बहुत तेज थे। दूसरी तरफ भारत के पास वेम्पायर जेट्स थे, जिसकी मारक क्षमता पाक जहाज के मुकाबले बहुत कम थी। लेकिन भारतीय वायुसेना के हौसले के आगे पाकिस्तान पस्त होने लगा।

पाक के कई लड़ाकू जहाजों को भारतीय जहाजों ने आग के गोले में बदल दिया। इससे पाक की हिम्मत पस्त होने लगी। 1965 की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने के लिए चीफ ऑफ एयर स्टाफ अर्जन सिंह को पद्मविभूषण दिया गया।