क्या वाकई पद्मावती के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने किया था चित्तौड़ पर हमला?

क्या वाकई पद्मावती के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर हमला किया था. ये सवाल इसलिए क्योंकि अगर उसके चरित्र को गौर से देखा जाए तो लगता नहीं है कि उसने पद्मावती के लिए ऐसा किया था.

चाचा की हत्या
अलाउद्दीन खिलजी ने अपने चाचा की हत्या कर दी थी. उसके चाचा उससे बहुत प्यार करते थे और बेटा मानते थे. लेकिन सिंहासन पर बैठने के लिए वह इस कदर पागल था कि उसने अपने बाप जैसे चाचा का कत्ल गले मिलते वक्त कर दिया. इस बात से साफ है कि वह सत्ता, सिंहासन, ताकत और जमीन का भूखा था.

मलिक काफूर के साथ संबंध
अपने गुलाम के साथ उसके संबंध थे. उसने कई अभियानों में काफूर को अपने साथ भी रखा. कई राजाओं के पास काफूर को अपने संदेशवाहक बनाकर भेजा. बताया जाता है कि काफूर के साथ उसके पति-पत्नी जैसे रिश्ते थे. इस बात से साफ है कि वह एक गे था और उसकी रुचि पद्मावती में ना होकर चित्तौड़ में थी.

30 हजार से अधिक हत्याएं
चित्तौड़ को जीतने के बाद उसने वहां तीस हजार से अधिक कत्ल कराए थे. राणा रतन सिंह के साथ जो सैनिक लड़ रहे थे वह मारे गए. सभी रानियों तथा बाकी स्त्रियों ने जौहर कर लिया. इसके बाद जो स्थानीय निवासी थे वह खिलजी के हत्थे चढ़ गए जिनका कत्ल उसने करा दिया. लगता है जैसे वह राजपूताना को संदेश देना चाहता था.

नहीं मानता था इस्लाम को
खिलजी इस्लाम को नहीं मानता था और उलेमाओं को दबा कर रखता था. बाकी सुल्तान जहां उलेमा की बातें सुनते थे वहीं खिलजी इस्लाम को छोड़ कर अपना नया धर्म चलाना चाहता था. हालांकि कई लोगों के कहने पर उसने ऐसा विचार त्याग दिया. उसे लगा कि जनता उसके खिलाफ भी हो सकती है. इस बात से पता चलता है कि वह खुद को अल्लाह समझने लगा था.

मरा था बुरी मौत
यही कारण था कि अलाउद्दीन खिलजी एक बुरी मौत मरा था और उसके मरते ही वह सारी जगहें जिन पर उसने कब्जा किया था वह आजाद हो गईं. उसे पेट की बीमारी थी. उसका पेट फूलता जा रहा था. इस बीमारी को जलोदर कहते हैं. ऊपरवाले ने उसे उसके कर्मों के हिसाब से मौत दी.