मीडिया की असली सच्चाई सामने लेकर आ रही है ये फिल्म

(वरिष्ठ फिल्म पत्रकार दीपक दुआ की कलम से) एक नामी अखबार में फोटो-संपादक के पद पर काम कर रहा शख्स अचानक बतौर लेखक-निर्माता-निर्देशक एक हिन्दी फिल्म लेकर आ जाए तो हैरानी होना स्वाभाविक है। 22 सितंबर को रिलीज होने जा रही फिल्म ‘जेडी’ को बनाने वाले फोटो-जर्नलिस्ट शैलेंद्र पांडेय से इस फिल्म को लेकर हुई बातचीत-

-क्या है ‘जेडी’?
-‘जेडी’ यानी जय द्विवेदी, जो एक पत्रकार है और ‘जेडी’ यानी ‘जर्नलिज्म डिफाईंड’ जो एक मैगजीन है जिसके लिए यह काम करता है। यह जय द्विवेदी की जर्नी है कि कैसे वह लखनऊ में हिन्दी के एक आम पत्रकार से दिल्ली का एक ताकतवर पत्रकार जेडी बनता है और कैसे वह अपने मालिकों, नेताओं और दूसरे लोगों के हाथों इस्तेमाल होता है।

-इस फिल्म के जरिए आप कहना क्या चाहते हैं?
-असल में इस कहानी के जरिए हम मीडिया जगत की उन बातों को सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं जो आमतौर पर सामने नहीं आ पाती हैं कि कैसे यहां लोग दूसरों के हाथों की कठपुतली बन जाते हैं और उन्हें पता भी नहीं चलता। साथ ही यह फिल्म एक प्रश्नचिन्ह है मीडिया के उन कथित बड़े लोगों के लिए कि वह अपने गिरेबान में झांके और बताएं कि क्या वह एक भी खबर बिना किसी दबाव के कर सकते हैं?

-फोटो-जर्नलिस्ट से फिल्मकार बनने का विचार कैसे आया?
-विचार पहले नहीं था, बस मुझे कैमरे से खेलना, उससे कुछ कहना अच्छा लगता रहा है। फिर धीरे-धीरे यह कहानी जेहन में आई और सोचा कि एक छोटी फिल्म बनाते हैं लेकिन बात बनती चली गई, लोग जुड़ते चले गए और देखते-देखते यह एक बड़ी फिल्म बन गई।

-‘जेडी’ के कलाकारों के बारे में बताएं?
-मुख्य भूमिका में ललित बिष्ट हैं, उनके साथ वेदिता प्रताप सिंह हैं जो कई फिल्में कर चुकी हैं। साथ में अमन वर्मा, गोविंद नामदेव, रीना चरानिया आदि हैं। इनके अलावा राजनेता अमर सिंह पहली बार एक फिल्मी किरदार निभा रहे हैं, टाडा कोर्ट के जज रहे पीडी कोडे जी भी एक अहम भूमिका में हैं।

-क्या उम्मीदें हैं आपको इस फिल्म से?
-उम्मीदें यही हैं कि इससे दर्शकों में एक अच्छा मैसेज जाएगा और भरपूर मनोरंजन के साथ जाएगा। इस फिल्म में एक्शन या रोमांस बिल्कुल नहीं है लेकिन सोशल मैसेज है, गीत-संगीत है, नौटंकी है और दर्शकों को इसे देख कर बोरियत नहीं होगी, यह मेरा वादा है।